चम्पावत

बालेश्वर मन्दिर समूह, चम्पावत

hear.asidehraduncircle.in :: kumaon(26).jpg यह मन्दिर समूह चन्द्र राजाओं द्वारा 14वीं शताब्दी ईसवी में निर्मित किये गये। मन्दिर लेटिना शिखर और सेकरी शिखर शैली के हैं। इनकी विशेषता यह है कि परिसर के दो मुखी मन्दिर दो मूल प्रसादों (गर्भगृहों) जिनमें प्रत्येक के आगे मंडप से जुड़ें है। सम्पूर्ण अलंकृत मन्दिर परिसर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में तथा स्थापत्य के नमूने ध्वंसावशेष अवस्था में है। पत्थर की काफी मूर्तियां अभी भी स्मारक स्थल पर उपलब्ध है दोनों मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।

कोतवाली चबूतरा, चम्पावत

hear.asidehraduncircle.in :: kumaon(28).jpg यह पत्थर का चैकोर चबूतरा है जिसकी लम्बाई 2.75 मी0 तथा ऊंचाई 0.83मी0 है। स्थानीय लोग इसे चोमरा या चबूतरा कहते हैं। सम्पूर्ण मध्य हिमालय क्षेत्र में इस तरह के स्थापत्य के नमूने मिलते हैं। प्राप्त साक्ष्यों से ज्ञात होता है कि ये चबूतरा काफी अलंकृत था तथा इसके ऊपर एक भव्य छतरी रही होगी। ऐसे चबूतरों का उपयोग किस लिए होता था, ज्ञात नहीं है। हालांकि स्थानीय मान्यता है कि इस स्थान पर राजा बैठता होगा तथा न्याय करता होगा। ऐसे चबूतरे सम्पूर्ण उत्तराखण्ड में प्रकाश में आते हैं।

बालेश्वर मन्दिर के निकट स्थित नौला, चम्पावत

hear.asidehraduncircle.in :: kumaon(27).jpg यह इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण जल संरचना है जो मन्दिर के दक्षिणी भाग में स्थित हैं जो चौकोर रूप में निर्मित धरातल के नीचे स्थित है, जिसमें धरती से निकलता हुआ पानी एकत्रित होता है। नौले के दो तरफ जमीन से थोड़ी ऊपर तक एक दीवार बनायी गयी है ताकि वर्षाकाल का पानी अन्दर न आ सके। सम्पूर्ण संरचना अलंकृत पत्थर से निर्मित है। इस प्रकार के स्थापत्य सम्पूर्ण मध्य हिमालय में प्राप्त होते हैं।