बागेश्वर

मन्दिर समूह, बैजनाथ, जनपद-बागेश्वर

hear.asidehraduncircle.in :: kumaon(4).jpg गोमती नदी के बायें तट पर स्थित यह मंदिर समूह उत्तराखण्ड के इतिहास में प्रमुख स्थान रखता है। इस क्षेत्र की पहचान प्राचीन कत्यूर घाटी से की जाती है। यह मान्यता है कि कत्यूर शासकों द्वारा जिला चमोली के जोशीमठ से लगभग 8वीं0 शताब्दी ई0 में अपनी राजधानी यहां स्थानान्तरित की गयी। परिसर का मुख्य मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है जो मूल रूप में नागर शैली में निर्मित है जिसका शिखर भाग ध्वस्त होने से वर्तमान में धातु की चादरों से अच्छादित है। इसके अतिरिक्त यहाँ 17 मन्दिर विभिन्न देवी देवताओं को समर्पित हैं। इन मन्दिरों का निर्माण 9-12वीं शताब्दी ई0 के मध्य कत्यूरी राजाओं द्वारा कराया गया।

लक्ष्मी नारायण, राक्षस देवल एवं सत्य नारायण मन्दिर तल्लीहाट, जनपद-बागेश्वर

hear.asidehraduncircle.in :: kumaon(1).jpghear.asidehraduncircle.in :: kumaon(2).jpghear.asidehraduncircle.in :: kumaon(3).jpg यह मन्दिर बैजनाथ मन्दिर समूह से पश्चिम दिशा में तल्लीहाट गांव में स्थित है। लक्ष्मी नारायण मन्दिर एक चाहरदीवारी के अन्दर स्थित है। मन्दिर में रेखाशैली का गर्भगृह तथा उसके पीछे पिरामिड के आकार की छत वाला मंडप है। इस मन्दिर की निर्माण शैली उड़ीसा के मन्दिरों के सामान है। मन्दिर का द्वार पर शक 1214 (1292 शताब्दी ई0) का अभिलेख अंकित है।

राक्षस देवल मन्दिर को रक्षक देव भी कहा जाता है। चारदीवारी के भीतर स्थित इसमें रेखा प्रकार का गर्भगृह, उसके पीछे पिरामिडनुमा शैली का मंडप है। मुख्य मन्दिर का शिखर आमलक युक्त है। अलंकरणों के अभाव में और स्थापत्य कला के विश्लेषण पर यह मन्दिर लक्ष्मी नारायण मन्दिर से कुछ समय पूर्व के प्रतीत होते हैं।

गांव से थोडी दूरी पर सत्यनारायण मन्दिर स्थित है। मौजूद स्थापत्य में शिखर एवं गर्भगृह के पत्थर विलुप्त हैं, हालांकि प्राप्त मूर्तिशिल्प और शिल्प के टुकड़ों से ज्ञात होता है कि यह भगवान विष्णु का विशाल मन्दिर रहा होगा।